गंतव्य स्थान भारत

दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाना

किसी भी तरह की यात्रा करते समय, बीमारियों से बचने के लिए यात्रा-पूर्व स्वास्थ्य सलाह लेना ज़रूरी है, लेकिन विशेष रूप से दोस्तों और रिश्तेदारों के यहाँ जाने से पहले यह बात और भी जरूरी हो जाती है। विकासशील देशों का दौरा करने वाले आधे से अधिक अंतर्राष्ट्रीय यात्री यात्रा के दौरान या यात्रा के बाद बीमार पड़ जाते हैं, इसलिए सेंटर फॉर डिज़ीज़़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन यात्रियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करता है कि वे यात्रा करने से पहले और यात्रा के दौरान सक्रिय, तैयार और सुरक्षित रहें।

अपने बारे में जानिए

क्या आपको दवाइयों और टीकाकरण की पूरी-पूरी जानकारी है? क्या आप इतने बीमार हैं कि यात्रा नहीं कर सकते हैं? समुद्रपार यात्रा करने पर आपको अनजानी बीमारियाँ हो सकती हैं, इसलिए भारत की यात्रा करने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि सेहतमंद बने रहने के लिए किए जाने वाले सभी उपायों से आप परिचित हैं।

दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए भारत की यात्रा करना

2010 में, ज्यादातर लोगों ने किसी अन्य कारण से नहीं, बल्कि अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए यात्राएँ कीं; इनमें उस वर्ष संयुक्त राष्ट्र के कुल अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों में से लगभग 30% यात्री शामिल थे, जिनकी संख्या लगभग 10,000,000 थी। जोखिम तो सभी यात्रियों को होता है, लेकिन भारत में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले यात्रियों के बीमार पड़ने का खतरा अधिक होता है। इन बीमारियों में मलेरिया, टाइफाइड, क्षयरोग, हेपेटाइटिस ए और यौन संचारित रोग शामिल हो सकते हैं।

अधिक जोखिम का मूल कारण यह है कि दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले 30% से भी कम यात्री यात्रा से पहले सेहत की जाँच करवाते हैं। क्या कारण हैं कि दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले यात्री बीमारियों की रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं अपनाते हैं?

• उन्हें स्थानीय रोगों के जोखिम की जानकारी नहीं होती है। • उन्हें लगता है कि वे स्थानीय बीमारियों से प्रतिरक्षित हैं। • स्वास्थ्य की देखभाल पाने या उसका खर्च वहन करने में उन्हें कठिनाई होती है। • कई क्लीनिकों में दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले यात्रियों की विशेष ज़रूरतों की पहचान नहीं हो पाती है और उनका उपचार किसी अन्य सामान्य यात्री की तरह ही किया जाता है।

जोखिम को समझें!

प्रतिरक्षा के बारे में गलत धारणा

भारत में पले बढ़े होने या भारत में रहने के कारण मात्र से आप टाइफाइड या मलेरिया जैसी बीमारियों से नहीं बच सकते हैं। व्यक्ति के एक स्थान से दूसरे स्थान में जाते ही यह प्रतिरक्षा तेजी से गायब हो जाती है जिसके कारण उसके द्वारा ली गई सुरक्षा समाप्त हो जाती है। यह ज़रूरी नहीं कि दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले सभी यात्रियों में भारत में रहने वाले उनके परिवार या दोस्तों की तरह स्थानीय जीवाणुओं के प्रति एक ही प्रकार की प्रतिरक्षा हो।

दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने पर जोखिम बढ़ जाता है

दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले यात्रियों में यात्रा संबंधी बीमारियाँ होने की आशंका अधिक होती है क्योंकि वे अन्य पर्यटकों की तुलना में अपनी स्थानीय संस्कृति में अधिक घुल-मिल जाते हैं। यात्रियों का यह समूह अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की तुलना में स्थानीय खानपान अधिक करते हैं और अधिक समय तक रहते हैं। • संयुक्त राज्य में आयातित मलेरिया के 54% मामले ऐसे यात्रियों में थे जो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं (पर्यटकों या कारोबार के सिलसिले में यात्रा करने वालों से 8-10 गुना अधिक) • दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले यात्रियों में टाइफाइड के 66% मामले देखे जाते हैं। • दक्षिण एशिया से पैराटाइफाइड-ए के 90% मामले आयातित होते हैं ।

यात्रा-पूर्व देखभाल की कमी

भारत की यात्रा करने वाले 30% से भी कम लोग यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्राप्त करते हैं। भारत का दौरा करने से पहले यात्रियों को वहाँ के अनुसार स्वास्थ्य की सलाह लेनी चाहिए। यात्रा से पहले चिकित्सा सलाह लेने से यात्रा संबंधी बीमारियों की आशंका और गंभीरता से बहुत हद तक बचा जा सकता है।

नकली और घटिया स्तर की दवाइयाँ

भारत में उपलब्ध दवाइयाँ और टीके अधिक कारगर नहीं होते और खतरनाक भी हो सकते हैं। इस जोखिम के बावजूद, कई यात्री भारत में स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति की प्रतीक्षा करते हैं, बजाय इसके कि वे इसे संयुक्त राज्य से मँगवा लें। • दक्षिणपूर्व एशिया में किए गए अध्ययन से मालूम चलता है कि स्थानीय रूप से खरीदी गई 50% तक की मलेरिया-रोधी दवाइयाँ घटिया स्तर की थीं। • मलेरिया के लिए खाई जाने वाली 88% दवाइयाँ घटिया क्वालिटी की थीं। वास्तव में, एशिया के अनेक हिस्सों में नकली या घटिया स्तर की औषधियाँ खरीदने की आशंका 30% से अधिक होती है।

बीमारी की लागत

याद रखें – परहेज करने की तुलना में किसी का इलाज करना बहुत अधिक खर्चीला होता है, इसलिए, यात्रीगण बाद में अधिक खर्च करने के बजाय अभी थोड़ा खर्च कर सकते हैं ।

बीमारी प्रति व्यक्ति इलाज रोकथाम मलेरिया $25,000 $200 से कम हेपेटाइटिस ए $1,800 - $2,500 और 27 औसत संख्या $300 से कम कार्य दिवसों की हानि के दोनों टीकों की खुराक के लिए मेडिकल $25,000 - $250,000 मेडिकल परित्याग बीमा $15-$300 1-3 सप्ताह की यात्रा के लिए

स्वास्थ्य सुरक्षा सलाह

• यात्रा की तारीख से कम से कम 4-6 सप्ताह पहले डॉक्टर से मिलें। • यह सुनिश्चित कर लें कि यात्रा करने से पहले आपकी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत है। • संयुक्त राज्य छोड़ने से पहले ज़रूरी टीके और दवाइयाँ खरीद लें। • यात्रा-स्वास्थ्य बीमा के विकल्पों का पता करें। दूसरे देश में रहते हुए बीमार पड़ने वाले यात्रियों को संयुक्त राज्य के स्वास्थ्य बीमा लाभ नहीं मिलता है। • बेहतर यात्रा सलाह के लिए सीडीसी की वेबसाइट देखें। • भोजन और पानी के साफ न होने के कारण टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए जैसी बीमारियों हो सकती हैं। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय का मज़ा ज़रूर लें, लेकिन खानपान में साफ-सफाई बरतना कभी न भूलें ।

याद रखें

यात्रा करना आनंददायक हो सकता है, लेकिन यात्रा करने के दौरान बीमार पड़ने से आपकी पूरी यात्रा बेकार हो सकती है। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने भारत जाने वाले यात्रियों को यात्रा संबंधी बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा अधिक होता है। इन यात्रियों में अन्य अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की तुलना में मलेरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और यौन संचारित रोग होने की अधिक संभावना होती है। भारत जाने वाले यात्रियों को प्रस्थान करने की तारीख से कम से कम 4-6 सप्ताह पहले डॉक्टर से मिलना चाहिए। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले प्रत्येक दस यात्रियों में से आठ यात्रियों को यात्रा-पूर्व स्वास्थ्य उपायों की जानकारी नहीं होती है।


संदर्भ


References

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